भारत जैसे कृषि प्रधान देश में खेती की उत्पादकता सिर्फ़ मौसम या मिट्टी पर नहीं, बल्कि जानकारी के प्रवाह पर भी निर्भर करती है। सही समय पर सही जानकारी किसान तक न पहुँचे तो न तो नई तकनीक अपनाई जा सकती है और न ही उत्पादन में सुधार। यही कारण है कि “संचार अवरोध/ संचार बाधा” आज कृषि विकास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।

संचार बाधा क्या हैं?
संचार बाधा का अर्थ है संदेश, सलाह, या तकनीकी जानकारी का किसान तक सही रूप में न पहुँच पाना या उसका गलत अर्थ निकलना। जब संदेश का स्रोत, माध्यम और श्रोता तीनों के बीच समन्वय नहीं होता, तो जानकारी बेअसर रह जाती है।
किसानों के बीच प्रमुख संचार बाधायें:
- भाषा और अभिव्यक्ति की कठिनाई – कृषि वैज्ञानिक या सलाहकार प्रायः तकनीकी भाषा का प्रयोग करते हैं, जिसे किसान सरलता से नहीं समझ पाते।
- शिक्षा और साक्षरता का स्तर – लिखित सुझाव या डिजिटल संदेश पढ़ने-समझने में कठिनाई होती है।
- तकनीकी पहुंच की कमी – कई गांवों में मोबाइल नेटवर्क कमजोर है या इंटरनेट उपलब्ध नहीं होता।
- विश्वास की कमी – किसान नए स्रोतों या अज्ञात सलाहकारों की बातों पर तुरंत भरोसा नहीं करते।
- सांस्कृतिक और सामाजिक अंतर – कुछ किसान नई तकनीक को “खतरा” या अपनी परंपरा से टकराव के रूप में देखते हैं।
इन बाधाओं का कृषि पद्धतियों पर प्रभाव
- आधुनिक तकनीक का सीमित प्रयोग – किसान सुधारित बीज, पौष्टिक खाद या सटीक कीटनाशन जैसी आधुनिक विधियां अपनाने में पीछे रह जाते हैं।
- उत्पादन में असमानता – सही जानकारी के अभाव में पैदावार में भिन्नता आती है।
- गलत निर्णय और नुकसान – समय पर फसल सुरक्षा या पोषण सलाह न मिलने से फसल हानि बढ़ती है।
- कम आय और जोखिम भरा कृषि व्यवसाय – अधूरी जानकारी से लागत बढ़ती है और मुनाफा घटता है।
इन समस्याओं के समाधान में कृषि जीके की भूमिका
कृषि जीके किसानों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच ज्ञान सेतु का कार्य कर रहा है। इसका मूल उद्देश्य है कि हर किसान को उसके खेत की वास्तविक दशा के अनुसार सरल, सटीक और भरोसेमंद सलाह सही समय पर मिले।कृषि विकास का मूल “सही जानकारी का सही समय पर संचार” है। जब संवाद पारदर्शी, विश्वसनीय और स्थानीय संदर्भ में उपयुक्त होता है, तब किसान न केवल नई तकनीकों को समझता है बल्कि आत्मविश्वास के साथ उन्हें अपनी खेती में अपनाता भी है।कृषि जीके का प्रयास किसानों की जानकारी, विश्वास और उत्पादकता तीनों को समान रूप से सशक्त करना है, ताकि खेती न केवल लाभदायक बने बल्कि टिकाऊ, वैज्ञानिक और भविष्य के अनुकूल भी हो सके। इस दिशा में कृषि जीके आधुनिक तकनीक, सैटेलाइट आधारित निगरानी और स्थानीय भाषा में सलाह के माध्यम से किसानों को ज्ञान से मजबूत और निर्णय में स्वतंत्र बना रहा है।
सूचना स्रोत:
- justagriculture.in/files/newsletter/2023/june/07. Agricultural Extension Education- Addressing the Needs of Marginalised Farmers.pdf)
- Farmers’ exposure to communication media in receiving agriculture extension and rural advisory services for farm sustainability – Billah – 2024 – Journal of Sustainable Agriculture and Environment – Wiley Online Library)
- भारतीय किसानों की चुनौतियां और समाधान – कृषि संकट के कारण और सुधार – Khetikyari
- nsdl.niscpr.res.in/xmlui/bitstream/handle/123456789/517/PDF Communication in Agriculture.pdf?sequence=1
