मध्य प्रदेश के कृषि में किसानों की आय बढ़ाने के लिए डॉलर चना की खेती एक बहुत ही लाभकारी विकल्प साबित हो रही है। यह रबी की फसल कम पानी में भी अच्छी तरह बढ़ती है और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद करती है। डॉलर चना प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर, और बाजार में अच्छा दाम मिलता है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ती है। सही सिंचाई, उचित बीज बुवाई तकनीक, और रोग-कीट नियंत्रण की जानकारी होने पर किसान इसे आसानी से उगा सकते हैं। यदि मध्य प्रदेश के किसान इस फसल को अपनाते हैं, तो वे न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं बल्कि खेती में विविधता भी सुनिश्चित कर सकते हैं।

क्यों लाभकारी है डॉलर चना की खेती
उच्च बाजार मूल्य: डॉलर चना के बड़े, आकर्षक और सफेद दाने होने के कारण इसकी मांग निर्यात बाजार और घरेलू उपभोक्ता दोनों में अधिक है, जिससे किसानों को अधिक भाव मिलता है।
मध्य प्रदेश की उपयुक्त जलवायु: मध्य प्रदेश की शुष्क और ठंडी जलवायु इसके लिए बहुत उपयुक्त है। यहां की दोमट और मटियार मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है।
पोषण का महत्व: डॉलर चना प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कैल्शियम का उत्कृष्ट स्रोत है, जिसके इसकी मांग निरंतर बनी रहती है, और यह एक लाभदायक व्यवसाय के रूप में देखा जाता है।
फसल विविधीकरण: यह फसल विविधीकरण अपनाने में मदद करता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और आय के स्रोत बढ़ते हैं। कई किसान इसे सह-फसली के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं।
छवि स्रोत:
- आईसीएआर-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईपीआर), कानपुर, चना की खेती के लिए दलहन उत्पादन दिशानिर्देश और प्रौद्योगिकी।
- जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जेएनकेवीवी), जबलपुर (मध्य प्रदेश), रबी फसलों के लिए अभ्यास पैकेज – चना (डॉलर चना)
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